Tuesday, 2 July 2019

राजस्थानी सौरम

राजस्थानी सौरम
सुभाषित धरोहर

अतिपरिचयादवज्ञा संततगमनात् अनादरो भवति।
मलये भिल्ला पुरन्ध्री चन्दनतरुकाष्ठम् इन्धनं कुरुते।।

हिन्दी भावार्थ ........अति परिचय (बहुत अधिक नजदीकियां) तिरस्कार का कारण बन जाती हैं और किसी के घर बार बार जाने से अति सम्मानित व्यक्ति का मूल्य भी घट जाता है, अनादर का कारण बन जाता है, जिस प्रकार मलय पर्वत की भिल्लनी चंदन की लकड़ी को ईंधन के रूप में जला देती है।
इण बात ने एक कवि इण तरह सूं व्यक्त करी अर दूहो लिख्यो...
अति परिचै ते होत है, अरुचि अनादर भाय।
मलयागिरि री भीलनी चन्दन देति जराय।।

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