Sunday, 12 May 2019

नीति रा दूहा Rajasthani Souram

नीति रा दूहा
 
मानै नहीं हरगिज,काम बिगाड़ू अचपळा।
इक काचर रो बीज,फाड़ै मण भर दूध नै।।
बखिया मति उधेड़,भरम गांठ रो जावसी।
घर री राड़ निवेड़, थनै पराई कै पड़ी।।
पाळै सबसूं प्रीत, बधै जसां री बेलड़ी।
करसी दुनियां चीत,प्रेम तणै बोहार नै।।
जीवण घणो अमोल,तोले सत कोडयां सटे।
जको निभावै कोल,साख बढै जग चौगणी।।
आळस बड़ी बलाय,मत आवणदै सांकड़ै।
भगवत करै सहाय,मैणत रा फळ मोकळा।।
-बंशीधर शर्मा
(प्रवासी राजस्थानी हाल कोलकाता री केई समाज सेवी संस्थावां सूं जुड़ाव अर राजस्थान परिषद सूं सक्रिय रूप सूं जुडय़ोड़ा कोलकाता में समाज सेवी अर चार्टड एकाउन्टेंट)

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