Tuesday, 28 May 2019

राजस्थानी पोथी


बिणजारो 39 बरस री साहित साधना
धोळे दोपारां तावड़ा री लाय मांय कूरियर वाळो आडो बजायो। खुडक़ो सुण पोतो
बारे देखतो हेलो पाडय़ौ, दादा डाक। म्हने उडीक ही क लारले दिनां कोलकाता
सूं वाटसएप मैसेज मिल्यो क किताब भेजूं हूं, स्यात व्हा पोथी आई हुवैला।
पण कूरियर वाळा रा पाना माथै दस्कत करयां पछै पोथी हाथ में ली तो बिणजारा
रौ नूंवों अंक हो। बिणजारो मतलब मायड़ भासा रा चाहवणिया लोगां रौ सालीणो
छापो। बिणजारो मतलब केई लोगां री रचनावां सारू नेमसर छपण वाळी पोथी।
बिणजारो जांणै गरमी रा दिनां री भरी दोपारां में तिसां मरता बटोही वास्ते
सूखता कुआ में मिलण वाळो निरमळ ठंडो पाणी जको कंठ आला ही नीं करै तिस
मिटाय’र चित्त में ठंडकार कर देवै। बिणजारो यानि क नागराज जी शर्मा री
सिरजण जातरा। बिणजारो जका में केई विधावां री रचनावां एके सागै मिलै। यूं
तो राजस्थानी मासिक बातां री सौरम जद १९९६ में सरू करी जणां केई लेखकां
सूं परिचै हुयौ अर उणां री रचनावां ने ठावी ठौड़ दिरीजी। नागराज जी शर्मा
१९९६ सूं लगोलग च्यार पांच साल तांई बिणजारा रा अंक डाक सूं भेज्या। पछै
म्हें पत्रकारिता सारू नागौर सूं जोधपुर अर कोलकाता मांय काम करतौ रहयौ
अर बिणजारा रा अंक मिलणा बंद हुयग्या।कोलकाता सूं २०१४ मांय पाछौ नागौर
आयौ जद भाई डॉ. महेन्द्रजी मिल डाक रौ पतो मंगायौ अर म्हने २०१५ में
बिणजारा रौ अंक भेज्यौ। अबकाळै फेरूं इण २४ मई री दोपारां महेन्द्रजी रौ
मैसेज मिल्यौ। मोबाइल में म्हने मैसेज दूजे दिन दोपारां ध्यान में आयौ
जणां हाथो-हाथ ही डाक रौ पतो मैसेज कर दियौ। अर आज चौथे दिन दोपारां तो
बिणजारो हाथ में हो। बिणजारो-३९ में है ३२० पानां री मायड़ भासा री
विधावां रौ लेखो। सरसरी निजर न्हाखी तो घणकरा लिखारा सूं तो बातां री
सौरम री बखत सूं ही जाण-पिछाण हुयौड़ी है। इण रा स्तम्भां में जोग लिखी
सूं लेय’र पोथी परख तांई कहाणी अनुसिरजण, लघुकथा, व्यंग्य, संस्मरण,
निबंध अर बिणजारो बाळद मांय पुराणां अंकां री जाणकारी है। ३८० पान्नां री
पोथी ने पढ़तंा तो बखत लागैला पण म्हें सोची क राजस्थानी सौरम रा पाठकां
तांई नूंवां अंक री जाणकारी दिराणी चाहिजै। राज रा कोई तरह रा सैयोग रै
बिना ३९ बरस तांई कोई पोथी रौ नेमसर प्रकासण करणों नागराज जी अर उणां री
मायड़ भासा ने समरपित टीम रा बुता री ही बात हुयां करै। साधुवाद उणां ने
क बरसां सूं साहित साधनां मांय लाग्योड़ा है अर लोगां ने भेळा राखै। आपां
रौ ओ दायित्व तो बणै ही है क सिरजण री इण अथक साधना ने हिरदा सूं लखदाद
देवां।
बाबूलाल टाक


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