Tuesday, 7 May 2019

ईसरा-परमेसरा-हरि रस

ईसरा-परमेसरा-हरि रस
रंग_राजस्थानी

विखो ब्रज मांय पङ्यौ बोह वार,धरै नख वार किता गिर धार।
वजाङि तु वार किताइक वंस,किता तैं फेरां जीत्योहि कंस।।44।।
कवि अर्थावे है
          हे ईश्वर ! कितनी ही बार आपने श्रीकृष्ण  के रूप में अवतार धारण किया । ब्रजभूमि में इन्द्र नें कुपित होकर जब मूसलाधार बरसना शुरू किया , जिससे घोर संकट छा गया तब आपने गोवर्धन पर्वत को अंगुली पर उठाया और समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की । परस्पर शत्रुता लिए दुःखी मानव समाज में भेदभाव को दूर करके एक -दूसरे के प्रति प्रेम और स्वकुटुम्बियों का सा व्यवहार करने के लिए मुरली के मधुर संगीत द्वारा प्रेमाभक्ति का संचार करके संसार के उद्धार का उपदेश दिया । कितनी ही बार आपने कंस को जीता ।
 
प्रस्तुति- सवाई सिंह महिया

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