Saturday, 12 January 2019

राजस्थान में नांव हुयो विविदिषा नंद सूं स्वामी विवेकानंद

राजस्थान में नांव हुयो विविदिषा नंद सूं स्वामी विवेकानंद

12 जनवरी स्वामी विवेकानंद जयंती,14-15 जनवरी मकर संक्रांति, 23 जनवरी सुभाष जयंती, 26 जनवरी गणतंत्र दिवस रौ उछ्ब मनावण सारू स्कूलां में आप ने बोलण रौ अवसर मिले तो राजस्थानी में बोलो...टाबरां ने सुणाओ...टाबरां ने बोलण रौ अभ्यास कराओ...
स्वामी जी रा प्रेरक प्रसंगा में थां बताय सको क व्हे राजस्थान में घूमया हा। राजस्थान री गर्मी सूं बंचावण वास्ते खेतड़ी नरेश अजित सिंह उणां ने राजस्थानी साफो पहरायो अर भगवा चोगो बणवायो। स्वामी जी रौ जलम रौ नांव नरेन्द्र हो, उणां री मां बेटा री चाहवा णा सूं विश्वेश्वर भगवान री पूजा करी। सन्यासी हुयां पछे स्वामी जी आपरो नाव विविदिषा नंद राख्या। खेतड़ी नरेश बोल्या क स्वामी जी ओ नांव बोलण में दोरो है जको आप हंकारो भरो तो म्हारी मन्शया है आप रौ नांव तो विवेकानंद हुवणो चाहिजे। स्वामी जी मुळक'र रहयग्या। पछे विश्व धर्म सम्मेलन में विदेश जावन्ती बेळयां खेतड़ी नरेश रौ पीए स्वामी जी ने पुछयो क आप रा विजिटिंग कार्ड मांय विवेकानंद लिखवा दयूं कहीं स्वामी जी फेरूं मुळकता हंकारो भर दिया। स्वामी जी रा जीवण माथे हजारूं पोथ्यां लिखी जी है कोलकाता में रामकृष्ण मिशन अर दूजी संस्थावां रै सागे नरेन्द्र कोहली री पांच भागा में औपन्यासिक पोथी बांचण अर सरावण जोग है।

अखण्ड दान पुण्य री सनातन परम्परा

 पेलां  मकर संक्रांति री दान-पुण्य री परम्परावां बताओ क इण दिन करयोड़ा दान रौ अक्षत पुण्य मिले। अर सुभाष जयंती री सांगोपांग जाणकारी देवो क आज देस रा बाल, किशोर, नवयुवक अर जवानां ने सुभाष बोस रा जीवण सूं प्रेरणा लेणी है।

गणतंत्र दिवस उछ्ब मनावण वास्ते राजस्थानी भासण

-गणतंत्र दिवस उछ्ब मनावण सारू भेळा हुयोड़ो से भाई सेणा ने घणे मान राम राम। म्हारे आंगणे सोना रा पगल्या मांडणिया मूंगा पांवणा राज रै पधारयां सोना रौ सूरज उग्यो।  म्हारे संस्थान रै कांनी सूं हिवड़े मांय अंजस लियां आप रौ सुवागत करूं। देस भर मांय लारला 15 दिनां सूं गणतंत्र दिवस उछ्ब मनावण सारू स्कूलां रा टाबर त्यारी करे हा। आज रै दिन आपां रौ दायित्व बणे क इण दिन उण शहीदां ने याद करां जका आप रै जीवण रौ बलिदान देयर आपां रा देस ने अंगरेजां सूं मुगती दिराई। स्वाधीनता सूं पेलां रा इयांका बलिदानी क्रांतिकारियां ने याद करता आवण वाळी पीढ़ी ने उणा री  देस सेवा सूं सीख लेवण रा संस्कारां सूं प्रेरित करां। देस री आजादी रै पछे सीमा री रछा करणीया भारतीय सेनिकां रा बलिदान ने याद करां जका आपरे घर परवार रौ मोह छोड़ अर आपां री सुरक्षा सारू सीमा माथे दिन रात पोहरो देवंता सहिद हुया। मां भारती रा सपूत क्रांतिकारी आपरो जीवण बलिदान कर स्वाधीनता दिराई, सेनिकां सीमा माथै आपां री सुरक्षा करे आपां रौ भी दायित्व है क आज देस रै वास्ते मरण वाळा री ठौड़ जीवण वाळा री घणी जरूरत सारू आपां रौ जीवण देस सेवा वास्ते समर्पित करां अर देस री एकता अर अखण्डता सारू काम करां। इण टांणे टाबर आपां री केई लूंठी अर अनूठी परम्परावां रै मुजब प्रस्तुतियां देय' र इण दिवस रा उछ्ब ने मनाय'र छाप छोड़ी। राजस्थान ने छोड़ अर देस रा सगळा प्रदेसां मांय इण दिन परम्परागत कपड़ा पहर अर टाबर आप री मायड़ भासा में लोक गीतां री प्रस्तुति देवे। पण राजस्थान में मायड़ भासा री मानता रा मामला में आय'र आपां चोट खावां। राजस्थान मांय ही मायड़ भासा राजस्थानी संवैधानिक मानता ने तरसे अर आपां रा मुंडा रै ताळो लाग्योड़ो है। राजस्थानी ने कोरी लोकगीत अर नाच गाणा तांई सीमित मत राखज्यो। स्वाधीनता दिवस समारोह रौ संचालन आपां राजस्थानी भासा मांय कर अर टाबरां ने इण री महत्ता बतावां। आप स्वाधीनता दिवस समारोह मांय ही नीं रोजीना ही राजस्थानी ने बोलचाल री भासा बणाओ अर बडेरां री ज्ञान री बातां टाबरां ने बताओ। आप तो आज ही संकल्प कर सको तो करो क राजस्थानी बोलांला अर आपां री आवण वाळी पीढ़ी वास्ते बडेरा रा इण ग्यान ने सुरक्षित राखता गणतंत्र दिवस उछ्ब समारोह सूं मनावा लां। म्हें इण टां णे दूजा राज्यां मांय रहवणिया भामाशाह प्रवासी पांवणा रौ भी काळजै री कोर सूं धन्यवाद आभार ज्ञापित करणों नीं भूल सकूं जका इण संस्थान री प्रगति अर विकास सारू आप रो सहयोग करया।

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