Tuesday, 1 January 2019

ईसरा परमेसरा

 रंग राजस्थानी
उगार बभीषण कीध अभीत,दिधी तैं लंक अलीध दईत।
दसानन कुंभ अजीत द्रजीत,सँघारिय लंक बहोङिय सीत।।42।।

कवि अर्थावे है क
       आपने रावण से जीतने के पहिले ही उसे लंका दे दी और उसे अभय कर दिया। किसी से भी नहीं जीते जाने वाले रावण , कुम्भकरण और इन्द्रजीत इत्यादि महाबली लंका के दैत्यों का नाश करके आप जानकीजी को वापस ले आए। 

प्रस्तुति -सवाईसिंह महिया

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