Friday, 28 December 2018

राजस्थानी सौरम मांय बांचो लोककथा

थां आच्छा अर थां भला
गांव रा एक मालदार सेठ ने एक’र गांवतरे जावणों पडय़ौ। कोई नौकर चाकर नीं हो जणां एकला ही टूरग्या। पाखती गांव घणों अळगो कोनी हो, जको सोच्या क बेळयां सारू सिंज्या पाछा गांव आय जावांला। पण काम तो काम री जुगत सूं ही हुवै। काम निवडय़ां बेळयां थका व्ही’र हुयग्या। सेठ गांवतरां सूं पाछा आपरे गांव जावै हा, दोपारां ढलगी। सेठां ने सोच ओ ही हो’क सिंज्या पडय़ां कोई धाड़ायती मिलग्यौ तो कांई करा लां। सेठ मन में बिचारी क आज तो कोई साथै ही कोनी अर जै कोई कुमाणस मिलग्यो तो मुसकल हुय जावैला। सेठ रस्ता में राम-राम करतो देवी-देवतां ने याद करण लाग्यौ। यूं करता-करता सेठां रौ आधो सूं बेसी रस्तो तो पार हुयग्यौ। सेठ गांव रै नेड़े पूग्यौ ही हो’क पाखती रस्ता सूं दो जणां आवंता दिख्या। सेठ रौ जीव तो अताळ-पताळ हुवण लाग्यौ। करै तो करै कांई। सेठ मन में बिचारी’क कन्ने कोडो ही कोनी लूटे ला कांई ? पण लूट हुवण री भूण्ड रौ ठीकरो माथा माथै फूटयां बदनामी हुय जावै अर एक’र कोई धाड़ायती सूं लूटिज्यां पछै लोगां री निजरां मांय आय जावां माल भलां ही मालमतो कीं नीं जावै। सेठ गांव रै नेड़ो पूग्यौ ही हो’क दोनंा री निजरां आंमी-सांमी हुई। सेठां देख्यो क अे तो दोनूं ही गांव रा ही दो जणां है। सेठ मन में बिचारी क है तो दोन्यूं ही धाड़ायती पण गांव रै नेड़ां हां जको अब कीं रगड़ो कोनी दोनूं जणां ने सम्हाल लेवां ला। दोनूं धाड़ायती मन में बिचारी गंाव सूं पेलंा ही मालदार सेठ मिलण सूं सुगन तो चौखा ही हुया है पण तरकीब सूं इणां रौ माल खोसणों चाहिजै। आ सोच अर दोनूं आपस मांय स्यानी करी अर राम-रामी करता सेठ रै नेड़े पूग्या। उणां में सूं एक जणों पूछयौ क सेठां म्हां दोनूं जणां में सूं कुण भलो अर कुण खराब हुय सकै। धाड़ायती सोच्या क दोनूं में सूं एक जणा ने भलो बतावैला जद दूजो सेठ रौ मालमतो रिपिया पइसा लूट लेवेला,पण सेठ एक’र मंाय ही दोनूं धाड़ायतयां री चाल समझग्या। अर दोनां ने टाळवां चौखा अर भला कैवण लागगो। सेठ एक जणां सूं बोल्यो क थें चौखा अर पछे दूजा ने कहवण लाग्यौ क थें भला मिनख हो। दोनूं धाड़ायती सेठ री बात कोनी मानी अर बार-बार पूछण लाग्या क सेठां बताओ कुण भलौ अर कुण बुरो। सेठ एक पावंडो आगे मेलतो अर एक जणां ने चोखो अर दूजा ने भलो बतावंतो रहयौ। सेठ आ बात कहवंती बेळयां दोनूं जणां ने एक रै पछै एक आगेनी धक्को देवंतो जावै हौ। सेठ दोन्यूं जणां ने टरकावंतो गांव रै नेड़े ले आयौ। गांव में पूगतां ही सेठ री हिमत बधगी अर बो जोर सूं बोलतो-बोलतो आप री दुकान रै कन्ने पूगग्यौ। गांव रा बजार में सेठ आपरी दुकान रे नेड़ो पूगतां ही दौड़ परो दुकान री चांतरी माथै चढ़ ग्यौ। अर दोनूं धाड़ायत्यां कांनी खारी निजर सूं देख’र जोर सूं बोल्यो क आछो,भलो अर चोखो कहवण सूं थाने संतोष नीं हुयौ, जणां लेवो म्हें अबे थां ने साची बात कहवूं‘क थां दोनूं ही नाजोगा हो। अब जाओ अर आप रै घर रौ रस्तो पकड़ ल्यो थां म्हारे कन्ने सूं कीं भी नीं लेय सकौ। थां दोनूं जणां ही म्हारो लारो छोड़ो, नीं तो अबार राज रा सिपाहियां ने बुलावूं अर थां दोनां री असली बात बताय दूं, दोन्यूं धाड़ायत्या कीं हाथ में नीं आवंतो देख अर चुपचाप आप रै घरां कांनी टुरग्या।

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