Tuesday, 18 December 2018

राजस्थानी सन्देसो लिखण रौ अंजस ...

राजस्थानी सन्देसो लिखण रौ अंजस ...
जीवन की जटिलता, दिन भर की व्यस्तता, देर रात 2 से 3 बजे तक जागते रहना, सुबह 6 से 6.30 बजे जगकर फिर इतनी व्यस्तता, दिन में 10-15 मिनट भी झपकी नहीं ले पाना, इन सब के बीच छोटे मोटे काम करते हुए परिवार के साथ सामाजिक दायित्व की जिम्मेदारी निभाना, कुल मिलाकर अस्त-व्यस्त जीवन। इस अस्त व्यस्तता में भी तात्कालिक काम और जुड़ जाते हैं और इन सब में कई बार जरूरी काम पिछड़ जाते हैं। वाट्सअप फेसबुक को भी अब समय नहीं दे पाने से अक्सर अपने राम को मिलने वाले सन्देश का प्रत्युत्तर भी नहीं दे पाने से कई बार मन मसोस कर रह जाता है, लेकिन इन सन्देश में कभी कोई जरूरी सन्देश वाट्सअप फेसबुक में नहीं देख पाने पर मन क्षुब्ध हो जाता और फिर कोशिश रहती है कि जब भी दो पांच मिनट मौका मिले मोबाइल टटोल लूं, इसमें एक ही खतरा रहता है कि ऐसे समय मुझे देखने वाले अक्सर यही सोचते हैं कि देखो बच्चों की तरह हर समय मोबाइल पर चिपका रहता है, जबकि हालत यह रही कि नवम्बर में तो राजस्थानी सौरम में भी कुल तीन चार पोस्ट ही ऑन लाइन कर सका यह सवा साल में पहली बार इतनी कम पोस्ट रही। इस व्यस्त दिनचर्या से छुटकारा नागौर से बाहर जाने पर सफर में ही मिल पाता है। ऐसे में ही कुछ दिन पहले दोपहर में भागते दौड़ते सरसरी नजर मोबाइल पर डाली तो बिन देखे सन्देशों की भरमार थी। बिना सेव किया एक नम्बर वाट्सअप पर दिखा,उत्सुकता से पढ़ा तो सन्देश में आग्रह के साथ अनुरोध था कि उनके विवाह की वर्षगांठ पर परिचितों के मिले बधाई सन्देश के जवाब में आभार व्यक्त करने के लिए राजस्थानी में सन्देश लिखकर उनको वाट्सअप कर दूं। मुझे लगा कि राजस्थानी सौरम के पाठक के आग्रह को सन्देश लिखकर भेज देना भी मायड़ भाषा के हेताळू पाठक का सम्मान होगा। राजस्थानी को मान्यता देने की मांग करने वाले यदि मायड़ भाषा प्रेमी के लिए इतना ही नहीं कर पाएंगे तो यह अपने कार्य क्षेत्र के प्रति न्याय नहीं होगा। यह विचार आते ही अंगुलियां मोबाइल के की-बोर्ड पर चलने लगी और तीन चार मिनट में ही सन्देश लिख कर उन्हें वाट्सअप कर दिया। यह सब करके मुझे उतना ही आत्मीय सुख मिला जितना गत दिनों बहुत बड़े व्यक्तित्व के भाषण से पहले बोले जाने वाले सम्बोधन के लिए राजस्थानी में सन्देश लिखवाते समय मुझे मिला था। इस राजस्थानी सन्देश को भी हजारों लोगों ने सभा में और लाखों लोगों ने सोशल मीडिया पर सुना। इससे ही मन में यह विचार आया कि कई अवसरों पर अपनी बात अच्छे तरीके से रखने के लिए राजस्थानी में लिखने बोलने के लिए लोगों को प्रेरित करना चाहिए, लोगों को राजस्थानी बोलने का अभ्यास होते हुए भी लिखने का अभ्यास नहीं होने से राजस्थानी में कुछ लिखने की ललक उनके मन में ही रह जाती है और चाहते हुए भी वे राजस्थानी में सन्देश लिख नहीं पाते हैं, अतः राजस्थानी भाषा के हेताळू सक्रिय मायड़ भाषा प्रेमियों से आग्रह है कि वे अपने आसपास ऐसी इच्छा रखने वालों को राजस्थानी में मैटर उपलब्ध कराएं। यह सन्देश आप सब की जानकारी के लिए इसका कोई भी उपयोग कर सकता है। 
घणेमान बाबूलाल टाक राजस्थानी सौरम नागौर 9413365577
 ...........राजस्थानी सन्देश..............
घणां मानिता ...
हिवड़ा रा हेत सूं घणे मान राम राम।
म्हांके ब्याव री बरसगांठ माथै प्रीत री रीत निभावन्तो आप रौ हेत भरयो सुभकामना सन्देसो बांच अर मन राजी हुयो। आप अर आपरे परवार रै सागे हिलमिल बिताया बगत ने याद करता म्हारे हिवड़े री कळी-कळी खिलगी। आप म्हने अर म्हारी जोड़ायत ने इयां ही लाडेसर मानता थका हेत बरसाता रहवो। आप म्हारे अंजस रै दिन ने याद राख्या इण सारू आप राज ने घणा-घणा रंग।आप इयां ही हेत बणाया राखज्यो। आप इण टाणे म्हाने याद राख्या आप सगळां रौ आभारी हूं, घणे मान घन्यवाद। बड़ां ने पगेलागणा अर छोटां ने सुभासीस। 
आपरो ही हेताळू ....जोड़ायत ...सागे ...नांव

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