Saturday, 1 December 2018

ईसरा-परमेसरा

रंग राजस्थानी हरि रस
धरी दध पाज महा नग धार,पदम्म अढार उतारिय पार।
पङ्यौ बळि आय बभीखण पाय,लिधौ तिहि राघव कंठ लगाय।।41।।
कवि अर्थावे
         वानरों नें बङे-बङे पर्वतों को रखकर ठेठ लंका तक पुल बनाकर अठारह पद्म सेना को पार उतार दिया । रावण द्वारा अपमानित होकर विभीषण आपकी शरण में आया उसे आपने हृदय से लगाया।

-प्रस्तुति सवाई सिंह महिया


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