Saturday, 3 November 2018

राजस्थानी कविता कवि अर परिचै

किताबां वाळो बाबो कवि दौलतराम डोटासरा
हड़मान गड
पोसाळ-पोसाळ घूम'र टाबरां सारू किताबां देवणिया कवि दौलतराम डोटासरा शुक्रवार 2 नवम्बर सुबै गांव रोड़ांवाळी हड़मानगड में सौ बरस पूरा करग्या।राजस्थानी अर हिन्दी रा साहित्यकारां उणा ने निवण करता सोशल मीडिया माथै जाणकारी दी क बावली बूच' अर 'जको करे काम, लुगाई ने पूछ-पूछ' समेत कई रचनावां सुनाय'र श्रोतावां ने खूब हंसावण वाळा कवि दौलतराम डोटासरा सौ बरस पूग्या। हनुमानगढ़ रै पाखती गांव रोड़ांवाली रा वयोवृद्ध साहितकार दौलतराम डोटासरा हनुमानगढ़ जिले रै स्कूलों में जाय'र आपरी  कवितावां री बाल पोथ्यां टाबरां में बांट अर नांव कमाया। जाणकार बताया क सुभाव सूं मजाकिया साढ़ी 82 वर्षीय डोटासरा गांव रोड़ांवाली रा पेला प्रभाकर अर बी.ए. री डिग्री लेवण वाळा हा। वर्ष 1973 में 'प्रेम और सौन्दर्य' विषय पर निबंध री पोथ्यां लिखी। इण रै पछे 1976 में 'इंदिरा जी के बढ़ते कदम' लिखी, अर आप खुद इन्दिरा जी ने भेंट करी। इण रै पछे  व्यंग्य विधा में गुस्ताखी माफ अर डंके की चोट पोथ्यां लिखी। इण रै बाद में बाल कवितावां लिखी। हिन्दी अर राजस्थानी में आप मोकळी बाल रचनावां लिखी। उणा रा लिख्योड़ा टुणकला घणां लोकप्रिय हुया। राजस्थानी सौरम रा पाठकां री निजर उणा रा टुणकला...
अंगूठो                                                                                                    
बै लगावे
कागदां माथै अंगूठो
बो भी झूठो
अड़े
बै जाणे कोनी
क ख ग घ ड़
पण बात बात पर अड़े
आंख
के काम री दो आंख
जद बै लिख जाणे
कोनी दो आंक
अरज
जठे मोटा मोटा 
करे है गरज
बठे कुण सुणे
गरीब री अरज
अभियान
बां चलायो
नसा विरोधी अभियान
खा'र जर्दे रौ पान

प्रस्तुति हरीश हैरी रै सेयोग सूं

No comments:

Post a comment