Wednesday, 3 October 2018

राजस्थानी गजल अर कवि परिचै

राजस्थानी गजल अर कवि परिचै
राजस्थानी सौरम री नेमसर प्रस्तुति मांय इण थम्भा में महीना री तीन तारीख ने राजस्थानी रा हेताळु पाठकां सारू कवि रौ परिचै अर राजस्थानी गीत, गजल कविता निजर करां ला। इण बार कवि परिचै में आप रै रूबरू हुवैला श्री पवन पहाड़िया--

घर री परिस्थितियां रै कारण दसवीं रै पछे पढ़ाई तो छुटगी पण दोखी में आदमी संभल जावै तो गुणीज जावै अर जोग संजोग सूं गुणी जणां रौ साथ मिल जावै तो सोना में सुहागो हुय जावै। आ ही पवन जी में हुई, टाबर पणां में राजस्थानी मासिक पत्रिका में छपयोड़ी रचना सूं अता प्रोत्साहित हुया क राजस्थानी में ही लगोलग लिखता रहया। लिखण रा कोड ने लक्ष्मण दान कविया री पारखी निजरां तोलती अर सुधारती रही।  9 जून 1955 रै दिन नागौर लाडनूं मार्ग माथै पारीक कुल देवी कुंजल माता रै धाम, रामस्नेही रामद्वारा अर जैन सन्ता री तीर्थ स्थली डेह गांव में जलमया पहाड़िया जी लारला बरसां में राजस्थानी समारोह सारू प्रदेस ही नीं देस भर मांय आप री जलम भोम रौ नांव कमायो। पोथी प्रकासन अर विमोचन रै सागे डेह गांव दस सूं भता राजस्थानी पुरस्कारां रौ केंद्र बणग्यो। घर गिरस्थी रा जंजाल में भारतीय जीवन बीमा री दोलड़ी जिम्मेदारी रै सागे रोजीना लिखण रौ नसो है।लेकिन के केन्द्रीय साहित्य अकादमी रा सम्मान रै सागे केई पुरस्कारां सूं सम्मानित पहाडियाजी री केई पोथ्यां छपगी। उणां री पोथी  नितरयो नीर सूं एक राजस्थानी गजल...


किण अबला री हाय लागगी

बीच समन्दरा लाय लागगी।
मूण्डे-मूण्डे चाय लागगी।।
दरसण छाछ दही रा उठग्या।
किण अबला री हाय लागगी।।
सागै पढ़तां रौ मन मिलग्यौ।
कुळ नीचो पण दाय लागगी।।
रिस्ता सगळा गया रसातळ।
थकां मावड़ी धाय लागगी।।
घरकी सीख धपळकां जैड़ी।
दुसम्यां री मन राय लागगी।।
खुटग्यो आज जमानो अतरो।
सास बहू रै पाय लागगी।।
ढंग बदळतो देख’रकुदरत।
लारै सब रै जाय लागगी।।


1 comment:

  1. पहाड़िया जी रो शानदार जीवन परिचय दिया हो सा

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