Monday, 1 October 2018

ईसरा-परमेसरा

रंग_राजस्थानी हरि-रस
 
हरी महम्माय धर्यौ छळ हाव,मिळै हनूमांन महाबळ माव।
बिंधै सत ताङ पमै कपि बोध,जदी बिहुँ भ्रात भिङै महा जोध ।।39।।
 
कवि अर्थावे ...
          हे ईश्वर , वनवास के समय महामाया श्री सीताजी को रावण कपट भेष बनाकर हर ले गया । महाशक्ति - सम्पन्न हनुमान जी से मिलाप हुआ । बालि द्वारा त्रसित कपि सुग्रीव से मित्रता की । सातों ताङ वृक्षों को एक ही बाण द्वारा छेदन कर सुग्रीव को यह बोध करा दिया कि वरदान द्वारा अभय प्राप्त बालि को आप मार देंगे । दोनों महाबली बालि और सुग्रीव आपस में लङनें लगै । 
 
--प्रस्तुति सवाईसिंह महिया
 
 

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