Monday, 3 September 2018

राजस्थानी गजल

राजस्थानी गजल अर कवि परिचै
 
राजस्थानी सौरम री नेमसर प्रस्तुति मांय इण थम्भा में महीना री तीन तारीख ने राजस्थानी रा हेताळु पाठकां सारू कवि रौ परिचै अर राजस्थानी गीत, गजल कविता निजर करां ला। इण बार कवि परिचै में आप रै रूबरू हुवैला श्री लक्ष्मण दान कविया--

कवि परिचै...
नागौर सूं मेड़ता अजमेर मारग माथै बस्योड़ा मारवाड़ मूंण्डवा रै नांव सूं प्रसिद्ध कस्बा सूं पेलां ही खेंण गांव रा रहवणिया लक्ष्मण दानजी कविया रौ जलम 12 जुलाई 1951 में हुयौ। हिन्दी साहित्य मांय एमए. तंाई पढय़ा कवियाजी डिंगळ रा जाणीकार अर राजस्थानी रा लूंठा साहितकार है। आपरी छपयोड़ी पोथ्यां मांय संदेसो, पाबूसर, गोविन्द गरिमा, रूंख सतसई, रुत सतसई, दुकाळ, सागड़ी, मजदूर सतसई, दुर्गा सतसई, कैलाश सतसई अर अंतस अगण है। राजस्थानी भासा री संवैधानिक मानता खातर लारला साढ़ी तीन दसकां सूं संघर्ष करणिया कवियाजी  1986 में राजस्थानी भासा मान्यता संघर्ष समिति री थरपणा करी। नागौर जिला सूं सरू हुयोड़ा इण संगठन रौ सरूप अन्तरराष्ट्रीय स्तर तांई पूगग्यौ। इण रौ एक संगठन राजस्थान मोटयार परिषद भी है। आप राजस्थान रोडवेज मांय नौकरी करता हा सेवानिवृति रै पछै साहित सेवा अर सामाजिक कामकाज मांय ही रम्योड़ा रहवै। राजस्थानी भासा मांय आप री रचनावां मांय सूं एक गजल आप सारू


अन्त में जावणौ पड़सी

गळै जम दावणौ पड़सी
अन्त में जावणौ पड़सी

अंधेरी रात आफळ नै
उजाळौ लावणौ पड़सी

खुणी रै गुळ लगा दीनौ
भरम भटकावणौ पड़सी

गया जद आय महफिल में
गीत तो गावणौ पड़सी

करी सरदा सारू सेवा
भलो बतावणौ पड़सी

चौरासी लाख जूणां रौ
फेरो तो खावणौ पड़सी

सिंवरलौ राम मन सांचै
नहीं पछतावणौ पड़सी

गोरियै गातड़ै इक दिन
राख बणजावणौ पड़सी


4 comments:

  1. वाहहहहहहहहहह ...आदरणीय कविया साहब रो कृतित्व अर व्यक्तित्व वाकई अनुकरणीय है...राजस्थानी सौरम रो ओ कदम घणौ सरावणजोग

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  3. आदरजोग टाक साब ! आपरी कितरी बढाई करू समझ सूं बारै है । म्‍हैं जिकी अााप सूं चावै हो बा आप मतै ई पेल कर दी इण खातर घणां घणां रंग ।
    आदरजोग लक्ष्‍मणदानजी कविया आपरो पूरो जीवण अर घर री बळी मायड़़ भासा खातर होम दी ज्‍यारों परचै आप पेली पांत लेय'र मायड़ भासा हेताळूवां रो मान बधायो इण खातर ई राजस्‍थानी सौरम नै घणां घणांं रंग । आप इण सारू महीना री तीन तारीख तै करी आ ई घणी आछी बात । जै आप मायड़ भासा री बीजीी खासैता ई इण भांत न्‍यारी न्‍यारी तारीखांं तै कर'र पाठकां सारू पेस करो तो मायड़ भासा री जोत घणी सांंतरी संजळ व्‍हैला । अाप इण मंच सूं म्‍हारी बात माथै अवस कीं नूवो दिरावोला । राजस्‍थानी सौरम नें भळै घणां घणां रंग -------------

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  4. आदरजोग टाक साब ! आपरी कितरी बढाई करू समझ सूं बारै है । म्‍हैं जिकी अााप सूं चावै हो बा आप मतै ई पेल कर दी इण खातर घणां घणां रंग ।
    आदरजोग लक्ष्‍मणदानजी कविया आपरो पूरो जीवण अर घर री बळी मायड़़ भासा खातर होम दी ज्‍यारों परचै आप पेली पांत लेय'र मायड़ भासा हेताळूवां रो मान बधायो इण खातर ई राजस्‍थानी सौरम नै घणां घणांं रंग । आप इण सारू महीना री तीन तारीख तै करी आ ई घणी आछी बात । जै आप मायड़ भासा री बीजीी खासैता ई इण भांत न्‍यारी न्‍यारी तारीखांं तै कर'र पाठकां सारू पेस करो तो मायड़ भासा री जोत घणी सांंतरी संजळ व्‍हैला । अाप इण मंच सूं म्‍हारी बात माथै अवस कीं नूवो दिरावोला । राजस्‍थानी सौरम नें भळै घणां घणां रंग ----------

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