Sunday, 16 September 2018

राजस्थानी री धरोहर

रमणियां रा सोरठा
 
मायड़ भासा राजस्थानी लोक भासा रै रूप मांय आखी देस दिसावर मांय आप री पिछाण राखै। राजस्थानी साहित मांय सोरठा आपरी न्यारी निरवाळी पिछाण राखै। लोक भासा रा लोक साहित मांय हजारूं दूहा अर सोरठा प्रचलित हुया जका रा रचण वाळा आप रै जीवण रौ निचोड़ इण दूहा सोरठा मांय रच्यौ। केई सोरठा तो रचण वाळा नांव सूं बौवार मांय आवै, पण केई सोरठां मांय कोई रौ नांव नीं मिलै। मायड़ भासा री इण धरोहर सूं आज राजस्थानी सौरम मांय रमणिया रा सौरठा बांच’र आणंद ल्यौ। राजस्थानी रा सरल सबदां मांय लिख्योड़ा इण सोरठा रौ अरथ बांचतां ही समझ मांय आय जावै इण सूं न्यारा अरथाव री जरूरत कोनी।

खावो राबड़ रोट, करो भजन करतार रो।
मस्त बण्यो रह सोट, रागड़दो ज्यूं रमणियां।।
जा विध राखै राम, ता विध ही रहणो भलो।
चिन्ता रो कै काम, रहो मौज में रमणियां।।
धीरज स्यूं कर जेज,काम करो सगळो सफळ।
ऊबा खेजड़ बेज,कदै न हुवै रमणियां।।
जिण दीन्ही है चूंच, चून भी बो ही देसी।
कुण नीचो कुण ऊंच, रैयत है सब राम री।।
संाची लागै बात, खारी जाणै नीम ज्यूं।
उल्लू न परभात, रीस न कीजै रमणियां।।

No comments:

Post a comment