Tuesday, 31 July 2018

काव्य गोष्ठी में राजस्थानी कविता

सेठयाजी री याद में सुजानगढ़ में काव्य गोष्ठी
सुजानगढ़ पद्मश्री कन्हैयालाल सेठिया जी री स्मृति में ‘साहित्य-साधना मंच’ रै कांनी सूं काव्य-गोष्ठी अध्यक्ष डॉ. साधना जोशी ‘प्रधान’ सरस्वती वंदना सूं करयो।सत्यम-रेस्टोरेण्ट में हुई गोष्ठी में मुख्य-अतिथि साहित्य-सागर रा एडमिन कवि ऋषि अग्रवाल रौ सम्मान लाडनूं रा वरिष्ठ कवि रामकुमार तिवारी, राजेश विद्रोही, यासीन अख्तर शॉल ओढा र करयो।
छापर कस्बे रा कवि गौरीशंकर ‘भावुक ‘तू जाया मुश्किल हो जासी, म्हारै सागै छल हो जासी|, आधी रोटी भावै कोनी, दादोजी परणावै कोनी|’ श्री मदनलाल गुर्जर जी ने-‘ जीणो है तो हँस-हँस जीणो, रो रो कर के जीणो के’, मरणो है तो एक दिन मरणो, रोज रोज को मरणो के|’ मायड़ भाषा री कविता सूं सेठिया जी ने श्रद्धा काव्य-सुमन अर्पित करया। कार्यक्रम में यासीन अख्तर राजेश विद्रोही, डॉ. साधना प्रधान, प्रकाश जांगिड़, रामकुमार तिवारी,बी. जी. शर्मा, दामोदर शास्त्री, हरिराम गोपालपुरा,ऋषि अग्रवाल,स्नेह प्रभा,कवि विश्वेन्द्रा,डॉ. शर्मिला सोनी,डॉ, घनश्यामनाथ कच्छावा ने कविता सुनाई।
_प्रस्तुति डॉ घनश्याम नाथ कच्छवाह

No comments:

Post a comment