Wednesday, 4 July 2018

ईसरा-परमेसरा

रंग_राजस्थानी हरि-रस
धरै नर देह अजोधिया धाँम, राजा दसरत्थ तणै घर रांम
अनंत विसामिंत रांम अणाय,सजै रिख जाग सकाज सहाय।।34।।

 कवि अर्थावे  हे प्रभु ! आपने अयोध्या में महाराज दशरथ के घर  मनुष्य देह धारण की। वहां आपके उस राम और लक्ष्मण रूप को महाराज दशरथ से महर्षि विश्वामित्र अपने यज्ञ की रक्षा के लिए मांगकर अपने साथ ले आए।
    ---प्रस्तुति सवाई सिंह महिया

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