Thursday, 12 July 2018

ईसरा-परमेसरा

रंग_राजस्थानी हरि-रस
वुओ वर व्याव वुछाव विसेस,धायै जहँ देव दिनेस धनेस।
कुबुद्धि किकेइ कुमंत्र किधेव,सिया वन रांम अनंत सिधेव।।37।।
कवि अर्थावे
          हे राम ! धनुष के टूटने पर आप चारों भाईयों का श्रेष्ठ विवाहोत्सव सम्पन्न हुआ । आपके सूर्यवंश में अवतीर्ण होने के गौरव से गर्वित और लालायित होकर इस अनुपम विवाह को देखने के लिए आपके पूर्वज भगवान् सूर्यदेव स्वयं और देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर एवं अन्य देवता मनुष्य रूप धारण कर वहाँ आये । आपके राज्यतिलक के समय मन्थरा दासी की खोटी मति से प्रेरित होकर कैकयी ने कुबुद्धि की जिसके कारण आपको लक्ष्मण और सीता सहित चौदह वर्ष का वनवास हुआ ।

  _सवाई सिंह महिया

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