Friday, 8 June 2018

ईसरा-परमेसरा

रंग_राजस्थानी
हरि-रस
पुकाराँ संत सुणी प्रतपाळ,दोङै उठ आरत दीनदयाळ।
राख्यौ तैं वार किता गजराज,महाबळि ग्राह हण्यो महाराज।।29।।
कवि अर्थावे-----
       हे दीनदयाल ! दीनों और संतों की पुकारें सुन करके आप कितनी ही बार आतुर हो उठे । गजराज की रक्षा के निमित्त पैदल दौड़कर आपने महाबली ग्राह को मार कर उसका भी उद्धार कर दिया । 
    प्रस्तुति-  सवाई सिंह महिया

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