Friday, 8 June 2018

बडेरां री सौरम

राजस्थानी साहित्यकार अम्बू जी शर्मा री यादां

कोलकाता गयां रै थोड़ा दिन पछे एक दिन दिनुगे मुक्ताराम बाबू स्ट्रीट रा राम मंदिर मांय दरसण कर लाइब्रेरी में जावै हो क श्रीमोहन जी सामां मिलग्या अर बोल्या 'बाबा याद कर रहें हैं।' जालान पुस्तकालय मांय म्हने देखतां ही पुस्तकालयाध्यक्ष स्व.बाबा श्रीराम जी तिवारी बोल्या 'ठीक बा टाकजी' फेर सांमी बैठा अम्बुजी शर्मा सूं म्हारो परिचै कराया। पछे तो उणा सूं केई बार मिलणो हुयो। काल सिंज्या रविन्द्र रायजी रा फोन सूं ठा पड़ी क कोलकाता प्रवासी राजस्थानी भाषा रा हिमायती वरिष्ठ साहित्यकार अम्बू जी शर्मा बुधवार दिनुगे 8 बज्यां सौ बरस पूरा कर लिया। आडम्बर अर तामझाम सूं आंतरा रहवण वाळा समर्पित साहित्यकार, सरल व्यक्तित्व अम्बुजी राजस्थानी साहित्य में रामायण जेड़ा उत्कृष्ट साहित्य रौ सिरजण करयो। त्रैमासिक पत्रिका नैणसी रौ सम्पादन अम्बु रामायण अर कृष्णायन उणा री जबरी पोथ्यां ही। व्हे ज्ञानभारती विद्यापीठ सूं जुड़या रहया।
 राजस्थान रा झुंझुनूं में नवम्बर 1934 में प्रह्लाद राय महमिया अर कावेरी देवी रै घरे जलमया अम्बु शर्मा री प्राथमिक पढ़ाई गांव में  हुई।  राजस्थान विश्वविद्यालय सूं हिंदी में एम.ए. साहित्य रत्न कर डिंगल भाषा में स्वर्ण पदक लियो अर 1954 में राजस्थान में अध्यापक बणया 1962 में विद्यालय निरीक्षक बणया पछे कोलकाता गया अर 1963 सूं कलकत्ता रा ज्ञान भारती विद्यापीठ में 1999 तांई पढ़ाया। अम्बु जी महाकाव्य, खंड काव्य,कहानियां, एकांकी, उपन्यास लिख्या अर चार दशक तांई  ‘नैणसी’ पत्रिका रौ संपादन करयो। नैणसी’ रै सागे राजस्थानी रा ‘पंचध्वनि’, ‘रश्मि’, ‘साहित्यिकी’, ‘राजस्थानी समाज’, ‘राजस्थान स्टैंडर्ड’, ‘लाडेसर’, ‘म्हारो देस’ और ‘सरवर’ रौ संपादन करयो। उणा एशियाटिक सोसाइटी रै वास्ते राजस्थानी पांडुलिपियों रौ अंग्रेजी सूची पत्र बणायो। राजस्थानी सौरम रै कांनी सूं उणा ने भावभीनी श्रद्धांजलि।उणा रा  बेटा विजय अर अजय महमिया समेत परिवार ने भगवान इण घड़ी सम्बल देवे।

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