Saturday, 2 June 2018

राजस्थानी कविता

अररर ऊंनाळाह...

तपै भौम तपै भोमिया,तपै बांध ताळाह।
रोम   रोम  अगन झरै,अररर  ऊनाळाह।।1

तपै अणुतो तावडौ,पैर जलै पाळाह।
लूं रोज लटका करैं,अररर ऊंनाळाह।।2

गरम हवा अण रातरी,चुभे तीर भाळाह।
कळपैं अंतस कामणी,अररर ऊंनाळाह।।3

भौम तपै हद भांतरी,जहन जबर जाळाह।
भावैं    कोनी भास्कर,अररर   ऊंनाळाह।।4

परा  मरैला  मिरगळा,हिमाले  हाळाह।
धरा तपावण धमक्यो,अररर ऊंनाळाह।।5

कुकै कोयल कागला,सूखै नद नाळाह।
रुकै लूवां न रैयत में,अररर ऊंनाळाह।।6

खैं चढ़ी असमान में,धकड़ धूं धाळाह।
आंधी  आई आंगणै,अररर  ऊंनाळाह।।7

टूटा  तूफां देखनें,दरखत रा डाळाह।
रैयत आंधी रोक दैं,अररर ऊंनाळाह।।8

भभकैं सगळा भींतड़ा,ऊकलैं घर आळाह।
गीं  आ'गैरी  बिजळी,अररर    ऊंनाळाह।।9

अगन झाळ ईळ ऊपरै,पड'री परनाळाह।
आय'र ढूळसी आंगणै,अररर  ऊंनाळाह।।10

अगन झरावै झाड़खा,सुना सब माळाह।
पेखत  कुकै पंखीडा,अररर  ऊंनाळाह।।11
-कृष्णपालसिंह चौहाण राखी

-कवि परिचै
राजस्थानी सौरम रा पाठकां तांई आ रचना अररर ऊंनाळाह...भेजी है, भाई कृष्णपालसिंह चौहाण राखी । भाई चौहाण जी सूं आज ही अरज करी क राजस्थानी सौरम सारू नूंवी नकोर रचना भेज सको तो भेजो । उणा रौ पडूतर वाट्सअप मिलयो क जरूर भेजूं ला। म्हे मन मांय सोची क नेठाव रा धणी दोय च्यार दिनां मांय रचना भेजेला पण बे तो घड़ी-घड़ाई त्यार रचना भेज दी। सौरम रा पाठकां री जाणकारी सारू बताय दयूं क मूलतः बाड़मेर जिले रै राखी गांव रा रहवण वाला कृष्णपालसिंह चौहाण श्री सरदारसिंह जी चौहान रा सपूत है, उणा री सादगी देखो क हाल जालोर में रहवण वाळा राखी व्यवसाय सूं ठेकेदारी करे,पण परिचय पूछ्यो तो आपरी शिक्षा-दीक्षा निसंकोच बारहवीं बताई। इण रचना ने बांचा जणा ठा पड़े क जद मां सुरसती री किरपा हुवे इयांनकी रचनावां रौ सिरजण हुवे, तो आप सरल सबदां मांय आनंद ल्यो इण रचना रौ।

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