Saturday, 2 June 2018

ईसरा-परमेसरा

रंग_राजस्थानी
हरि-रस।  छंद- मोतीदाम
पाळ्या प्रत वार किता प्रहळाद, सुणंतां सेवक आरत साद।
दिया तैं वार किता वरदांन,थप्यौ ध्रुव राज अविचळ थांन।।28।।
कवि अर्थावे
        आपने कितनी ही बार भक्त प्रह्लाद की आर्त्त पुकार को सुन करके उसकी रक्षा की और कितनी ही बार ध्रुव को वरदान देकर आपने उसे अचल स्थान दिया ।
प्रस्तुति- सवाई सिंह महिया

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