Monday, 18 June 2018

ईसरा-परमेसरा

रंग_राजस्थानी.  हरि-रस

भगीरथ भेख भयौ तु , भुगोळ करंतिय आंणिय गंग किलोळ।
किताइक वार नरां सुख कीध,दया करि देव त्रिविस्टप दीध।।31।।
कवि अर्थावे
     कितनी ही बार भागीरथ  के रूप में हे देव ! पृथ्वी पर कल्लोल करती हुई गंगा को आप दया करके ले आये जिससे सहज ही प्राणीमात्र को स्वर्ग सुख का अधिकारी बना दिया।

    प्रस्तुति-  सवाई सिंह महिया

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