Friday, 1 June 2018

ग्यान रौ खजानो सुभाषित

उथलो संस्कृत - हिन्दी - राजस्थानी
रिषि मुनि देव भासा संस्कृत में ज्ञान रा भंडार सुभाषित रौ खजानों सूंपयो। इण रौ हिन्दी अनुवाद अर राजस्थानी मांय अर्थाव लोक प्रचलित अर प्रसिद्ध हुयो। आज आ प्रस्तुति आप री निजरां सांमी
-विद्या मित्रं प्रवासेषु ,भार्या मित्रं गृहेषु च।
व्याधितस्यौषधं मित्रं,धर्मो मित्रं मृतस्य च।।
हिन्दी अरथाव
इस सुभाषित में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति के लिए यात्रा में ज्ञान सच्चा ही मित्र, घर में पत्नी ही उसकी सच्ची मित्र,बीमारी में दी जाने वाली औषधी तथा मृत्यु के समय धर्म ही सबसे अच्छा और सबसे अधिक बड़ा बलवान मित्र साबित होता है।
राजस्थानी अरथाव
इण सुभाषित मांय बतायो गयो है क कोई भी आदमी रा जीवण मांय उण रै वास्ते जातरा मांय ज्ञान ही सांचो मितर, घर मांय जोड़ायत ही सांची  मितर, बीमारी मांय औखद अर मिरतकाळ री बेळयां धर्म ही सागे चालण वाळो सांचो मितर हुवे।

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