Friday, 1 June 2018

ईसरा-परमेसरा

रंग_राजस्थानी
हरि-रस।  छंद- मोतीदाम

दळ्या कई वार वडाळ दईत,इंद्रापुर दीधउ सक्र अजीत।
हण्या नख वार किता हिरणक्ख,भवानि र भैरव दीधौ भक्ख।।27।।
कवि अर्थावे 
     हे ईश्वर ! कितनी ही बार आपने बङे-बङे दैत्यों का नाश करके उनसे इन्द्रपुरी को छीना और उसे पुनः इन्द्र को दे दिया । कितनी ही बार हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष को नखों द्वारा विदीर्ण करके भवानी और भैरव को उनका भक्ष दिया । (हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यपु राक्षस दोनों भाई थे ।)
प्रस्तुति- सवाई सिंह महिया

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