Wednesday, 9 May 2018

सबद अर केबतां राजस्थानी

सबद अर केबतां राजस्थानी
हंसता-हंसता सीखो भूल्या सबद अर केबतां...
गेलसपो कठैई को बगनो हुयोड़ो फिरे आजकाले। कीं करे न कीं काजे। वाट्सअप अर फेसबुक रै आगे इन्हे तो कीं सूझे ही कोनी। बावळो 24 घण्टा फेसबुक अर वाट्सअप रौ लारो ही कोनी छोड़े। हर टेम चकबन्गो हुयोड़ो फिरे। कीं  आगे लारे की देखे सोचे ही कोनी,सोचे कांई गेलसपी टाट ने कीं सूझे जणा। कद अकल आवेला। अबे ओ एकलो कोनी घर वाळा गळा में गळावन्डो घाल दियो। नेम करे तो घराळी के ही नीं-नीं करता काजळ टिकी रौ खरचो बधगो। रोटी बाटी रौ तो कीं कोनी भेळप रा चूल्हा मांय दो रोटी भती सेक लेवेला। पण बाकी खरचा में तो घर सूं घर कोनी चाले। घड़ी घड़ी मोबाइल रा डबल्या में आंख्यां फोड़े। कांई ठा कद समझ में आवेला गेलसपी झालर ने।

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