Thursday, 3 May 2018

रंग_राजस्थानी

हरि-रस ईसरा-परमेसरा
वेदां रीय व्हार करी कई वार, सुधी लइ कीध दईत सँघार।
विमोहिय रूप अगाध बणाय, जटाधर काज दईत जल़ाय।।24।।

            कितनी ही बार दैत्यों का संहार करके उनसे वेदों की रक्षा की और भगवान शंकर के लिए अत्यंत सुन्दर मोहिनी रूप धारण कर भस्मासुर दैत्य को जला डाला ।

प्रस्तुति---सवाई सिंह महिया

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