Wednesday, 18 April 2018

कविराजा सोरठा लिख'र चाकर ने अमर कर दिया इतिहास मांय

कविराजा सोरठा लिख'र चाकर ने अमर कर दिया इतिहास मांय

कवि कृपा रामजी री मांंदगी में राजिया नांव रौ सेवक घणी सेवा करी। एक दिन कवि कृपाराम जी सेवक ने उदास देख अर पूछ्यो क राजिया थांके क्यां रौ दुख है। सेवक राजिया कहयो क म्हारे कोई औलाद नीं हुवण सूं मरयां पछे कोई नांव लेवण वाळो नीं रहवेला। मांंदगी  में सेवा सूं राजी हुयोड़ो कवि बोलयो क म्हारा रच्योड़ा दूहा सोरठा थां ने सम्बोधित करता लिखूं ला। सत अर असत री नीतिगत बातां वास्ते लिख्योड़ा दूहा सोरठा में लोग थां ने याद राखेला। राजिया रै नांव सूं विद्वान कवि नीति रा दोहा सोरठा री रचना करी। राजिया रा दूहा अर  राजिया रा सोरठा नांव सूं प्रसिद्ध हुया क आज भी लोग राजिया रौ नांव तो जाणे  पण कवि कृपाराम जी ने कम लोग ही जाणे।
राजस्थानी में नीति री बातां वास्ते लोक जीवण में दूहा अर सोरठा लिखण री विधा में राजिया रा दूहा प्रसिद्ध हुया।भासा अर भाव री दीठ सूं संबोधन काव्य में आ अनोखी रचना हुयगी।कवि कृपाराम जी उण बखत रा मारवाड़ राज्य रै खराडी गांव रा रहवण वाळा खिडिया चारण जाति रा जगराम जी रा बेटा हा। जगराम जी ने कुचामण रा शासक ठाकुर जालिम सिंह जी जूसरी गांव री जागीर दिवी, जठे कृपाराम जी रौ जलम 1825 में हुयौ।राजस्थानी भासा में  डिंगल अर पिंगल रा उतम कवि हुया। उणां री विद्वता अर गुणा सूं  प्रभावित हुयर सीकर रा राव राजा लक्ष्मण सिंह जी इणा ने महाराजपुर अर लछमनपुरा गांव 1847 अर 1858 में जागीर में दिया हा।
जोधपुर रा तत्कालीन विद्वान् महाराजा मान सिंह जी सेवक राजिया सूं मिलण वास्ते आदर सहित दरबार में बुलवाया अर उणां री किस्मत ने सराहवन्ता भरया दरबार में ओ सोरठो सुणायो।
सोनै री सांजांह जड़िया नग-कण सूं जिके।
किनौ कवराजांह, राजां मालम राजिया।।
अर्थात हे राजिया ! सोने रा आभूषणां में रत्नां रा जड़ाव री जियां सौरठा रच अर कविराजा थां ने राजावां रै बरोबर प्रसिद्ध कर दिया.

2 comments:

  1. जोरदार सा.....

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  2. चोखी नुवीं जाणकारी सा। 🙏🙏

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