Sunday, 18 March 2018

ईसरा-परमेसरा



रंग_राजस्थानी हरि-रस---छंद मोतीदाम

सुतो वङ-पान समाध समंद,माया स्रव सांवट बाल़मुकंद।
उपन्नाय दांणव दोय अजीत,भजै स्रव देव हुआ भयभीत ।।18।।

      विराट विश्व की सब माया को समेट कर प्रलय - सIमुद्र के बीच वट पत्र पर समाधि लगाकर आप बालक रूप में सो गये । उस समय मधु और कैटभ दो अजय दैत्य देवताओं के साथ उत्पन्न किये जिनसे भयभीत होकर देवता लोग इधर-उधर भागने लगे ।
प्रस्तुति--सवाईसिंह महिया

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