Saturday, 17 February 2018

परम्परावां

राजस्थानी में ब्याह री कूं कूं पतरी छपावणिया नै घणा-घणा रंग

आपां खुद नै ई आगै आणो पड़सी,फैर सिरकार री के जाड़ है कै मानता ना देवै। राज रौ कांई माजनो मानता कोनी देवे। राजस्थानी ने मानता राज नी समाज देवे। आज सूं राजस्थानी नै आपां खुद ई मानतां देवां हरेक ठौड़ जठे बस चले राजस्थानी में लिखणो सरू कर दयो। राजस्थानी में ब्याव री कूं कूं पतरी छपवाणो भी अपणै आप में अेक आंदोलन ने समर्थन करणो हुवेला। लोग बेगा सा इण बात नै स्वीकार भी ना करै पण मायड़ भासा सारू रोजीना रा छोटा सा काम सूं भी  आंदोलन ने समर्थन मिलसी। मायड़ भासा सारू लड़णो पड़सी, धरणो देणो पड़सी अर मरणो पड़सी।
-आप यूं भी समर्थन कर सको इण पोस्ट ने आगै पूगती करो।
-लोगां नै इण सारू त्यार करो। मायड भासा री सेवा करो अर फेर देखो मानता देवण खातर दिल्ली अर राजस्थान री सरकार री चूळ किंया कोनी हिले।।  जै जै राजस्थानी

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