Monday, 1 January 2018

रंग_राजस्थानी

ईसरा सो परमेसरा
पीठ-धरण धर पाटली ,हर-उत लेखणहार ।
तउ तोरा चरितां तणों ,परम न लभ्भै पार ।।5।।
कवि अर्थावे------
           समस्त पृथ्वी तल की पाटी बना ली जाय और उस पर श्री गणेशजी स्वयं लिखने वाले हों , तो भी हे परम प्रभो ! आपके चरित्रों का पार नहीं पाया जा सकता ।
प्रस्तुति--सवाई सिंह महिया

1 comment:

  1. आभार....ईसरा परमेसरा....

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