Monday, 22 January 2018

रंग राजस्थानी

ईसरा परमेसरा
आभ विछूटा मांणसां , है धर झल्लणहार ।
धरणीधर ! धर छंडतां , असहां तू आधार ।।9।।
कवि अर्थावे है क...
    ... अन्तरिक्ष से बिछुङे हुए प्राणियों को आपका माया रूप संसार (पृथ्वी) धारण करने वाला है , परन्तु हे पृथ्वी को धारण वाले धरणीधर ! संसार को छोङते समय हम समस्त जीवों का आश्रय तो केवल आप ही हैं ।
प्रस्तुति----सवाईसिंह महिया

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