Friday, 12 January 2018

रंग राजस्थानी

ईसरा सो परमेसरा
कथां केम ईसर कहै ,खांण सकल प्रत खेत ।
वयण स्रवण ना मन बसै ,निगम अगोचर नेत ।।7।।
कवि अर्थावे........ ईसरदास जी कहते हैं कि मैं उस परब्रह्म का कथन कैसे करुं जो कि स्थूल , सूक्ष्म और कार्य- करण समस्त सृष्टि रूप सकल खानि के प्रति आधार है । जो  न तो वाणी द्वारा वर्णन , न कानों से सुना और न ही मन से मनन किया जा सकता है ।जिसकी साक्षी शाश्वत वेद अगोचर और नेति-नेति कहकर देते है ।
----प्रस्तुति---सवाईसिंह महिया

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