Thursday, 28 December 2017

रंग_राजस्थानी------ईसरा सो परमेसरा

लागां हों पहला लल़ै ,पीतांबर गुरु पाय ।
भेद महारस भागवत ,पायो जेण पसाय ।।३।।
___  मैं सर्वप्रथम अपने गुरुदेव श्री पीताम्बरदास जी के चरण कमलों में झुक कर प्रणाम करता हूं , जिनकी कृपा से श्रीमदभागवत में वर्णित महान् रस के रहस्य को प्राप्त कर सका हूं ।

प्रस्तुति-----सवाईसिंह महिया

1 comment:

  1. आभार टाक सा'ब....

    हरिरस रो रसास्वादन सगल़ां सारु लावण रो आभार.....
    ईश्वर री परमसत्ता आपने निरोगा राखै अर आप यूं ही...म्हां सगल़ां ने अमृतवाणी पढावता रेवो.....आभार.....

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