Thursday, 28 December 2017

राजिया रा सोरठा

हर कोई जोड़े हाथ, कामण सूं अनमी किसा।
नम्या त्रिलोकी नाथ,राधा आगळ राजीया।।

कवि अर्थावे है कि इण दुनिया मांय सगळा लोग उण ने हाथ जोड़े अर लुगायां रै आगे नीं झुकण वाळा व्यक्ति भला कुण हुय सके है ? हे राजिया ! जद तीनूं लोकां रा स्वामी श्री कृष्ण भी राधा जी रै आगे झुकता हा तो पछे हा साधारण मनुष्य री तो बात ही कांई है ?

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