Friday, 29 December 2017

रंग राजस्थानी

ईसरा सो परमेसरा
भगतवछल़ ! मो दे भगति ,भांज परा सह भ्रम्म ।
मुझ तणा क्रम मेटवा ,कथां तुहाल़ा क्रम्म ।।4।।
    ------ ईसरदास जी कहते हैं कि हे भक्तवत्सल ! मेरे समस्त संशय मिटाकर मुझे आपकी भक्ति का दान दीजिये , जिससे में अपने शुभ और अशुभ कर्मों का नाश करने के लिये आपके चरित्रों का वर्णन करूं।

प्रस्तुति-------सवाईसिंह महिया

1 comment:

  1. जै ईसरदास जी.... ईसरा सो ही परमेसरा

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