Monday, 11 December 2017

ईसरा सो परमेसरा

रिध-सिध दियण कोयला रांणी,बाल़ा  बीजमंत्र  ब्रहमांणी।
वयण-जुगति द्यौ अवचल़ वांणी,पुणां क्रीत जिम सारंगपांणी ।।2।।
कवि अरथावे क......... रिद्धि-सिद्धि देने वाली हे कोकिलारोहिणी देवी भगवती ! आप ही बालस्वरूप , बीजमंत्र और ब्रह्माणी (प्रणव स्वरूप , गायत्री और सरस्वती ) हैं । आप मुझे युक्ति युक्त और अविचल वाणी प्रदान कीजिये , जिससे मैं सारंगपाणि भगवान विष्णु की कीर्त्ति का वर्णन कर सकूं ।
प्रस्तुति----सवाईसिंह महिया

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