Monday, 11 December 2017

राजिया रा सोरठा

अवनी रोग अनेक, ज्यांरो विधि किधौ जतन।
इण परकत री एक, रची न ओखद राजिया।।
कवि अर्थावे है क धरती माथै केई रोग है, जका रा भगवान इलाज बणाया, पण हे राजिया मिनख रा सभाव रा इलाज री एक भी दवा नीं बणाई।

No comments:

Post a comment