Saturday, 18 November 2017

बडेरां री सीख

काणा ने काणों नहीं कहणों,कहणो भाई सैंण।
होले-होले पूछणो थारा किंयां फुटया नैण।
राजस्थानी रा दूहा नीति री बातां सूं भरयोड़ा है जका कोई न कोई सीख देवे। इण दोहे में कवि कहवे क कोई भी आदमी ने टूटतो बोल नीं बोलणो। आ बात सही है क एक आंख फ़ुटयोड़ा ने काणों कहवे पण उण ने बतलांवती टेम आ नीं कहणो के काणा था री एक आंख क्यां फूटी उणा ने तो आ ही पूछ णो के थारी आंख कियां फूटी। मतलब कोई ने ओछो नीं बतलावणो।

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