Monday, 13 November 2017

केबत

उतणा पांव पसारिए, जितरी लांबी सौड़।
बडेरा कहवंता हा के जित्ता साधन हुवे बितो ही काम करणो  चाहिजै। आजकाले रा टाबरां री आदत है क बे बुता सूं बारे काम करे। अर पछे सज नीं खावे जणा दुख पावे। पेलां खेती अर बिणज बोपार वास्ते आ केबत बडेरा कहवन्ता पण आजकाले तो इण केबत ने केई मामलां में बोल बतलावण में कह सकां।

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