Saturday, 28 October 2017

परम्परा

मिन्दर दर्शन एक सूत्र में बांधण री परम्परा

दिनुंगे अर सिंज्या आरती री बखत मंदिर पूगणों चाहीजै। यूं तो देस भर में केई बड़ा मिन्दर है जठे लोग दरसण वास्ते केई घण्टा ऊबा रहवे पण आपां रै आगति पागति रा मिन्दर देखो तो हालत चोखा नीं कह सकां। बठे आरती री टेम झालर, शंख, नगाड़ा बजावण वास्ते लोग नीं हुवै। कीं लोग तो इण बात सूं राजी है क इलेक्ट्रिक मशीनां आयगी अर लोग भलां ही नीं पुगे आरती पूजा मतां ही जू जावै। पण इण बात माथे विचार क्यूं नीं करो क मिन्दर में हुवण वाळी आरती में  चार लोग नीं पुगे। मिन्दर सार्वजनिक ठौड़ है जठे  जावण सूं मोहल्ला वाळा लोग भी एक दूजा ने पिछाण सके और सामाजिक एकता भी हुय सके।
इण कारण सूं मिन्दर जावण री परम्परा बडेरा चलाई।
-रोजीना नहाय धो पूजा वास्ते मिन्दर जावण सूं दैनिक जीवण में नियमितता आवे।
-सूरज उग्यां सूं पेलां ही मिन्दर जावे तो इण रै पछे बिचार कर योजनाबद्ध तरीका सूं नियमितत सरू कर सके।
-मिन्दर ही आपां ने एक दूजा ने जोड़े। एक दूजा ने जोड़ण में सहायक हुय सके।
 आओ कोसिस करां क आप रा व्यस्त जीवण में कीं बगत में सूं कीं टेम धर्म री रक्षा, राष्ट्र री एकता, अखंडता अर आपां रा संस्कारां वास्ते दो मिनट मिन्दर में जाय अर बिताओ।

1 comment:

  1. राजस्थानी सौरम बहुत ही अच्छा लगता है

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