Saturday, 21 October 2017

परम्परा में बडेरां रा कागद

दिवाळी रा घणे मान रामा सामा मानज्यो
                                                 नागौर मारवाड़,
तिथ काति सुदी दूज भाई दूज वार शनिवार वि.सं. २०७४          
सिधश्री जोग लिखी ओपमान बिराजमान सैर नागौर मारवाड़ सूं मायड़ भासा रा पाठकां ने राजस्थानी सौरम रै कांनी सूं घणै मान राम-राम, जै श्रीकृष्णा। दिवाळी रा घणै मान रामा-सामा मानज्यो। अर सागे-सागे भाई दूज रा राम राम मानज्यो।
अपरंच समंचार है क दिवाळी री सिमरधता छोटा-छोटा गांवां में देखणने मिली। बराण्डेड कपड़ा सूं लेय’र इलेक्ट्रानिक आयटम तांही री सब तरहां रा सामान री बिक्री गांवां में हुवण लागगी। गांवां में ही मोबाइलां रा श्योरूम, मोटर साइकिलां अर बडी गाडयां रा श्योरूम खुल्योड़ा है जठा री बिकरी किरोड़ां मांही पूगगी। च्यारूं मेर मां लिछमी री मेहर दिखै। लोग चाव सूं सामान खरीद रहया।  
आगे समंचार है क अबकाळी दिवाळी देस रंग में रगीज्योड़ी रही। गांवां अर सैहरा में तिरंगा रा रंगयोड़ा दीयां री जोत जगमग करती रही। लारला केई दिनां सूं माटी रा दीयां री लांठी खरीद हुई। देस में बण्योड़ा सामान री खरीद सारू अठै भी लोग बिजळी री लटूडय़ां री ठौड़ घी तेल रा दीया री लेणां जगमग करी। लोगां में सामूहिक रूप सूं दीया मोल लेवण अर केई जगां तो लोगां में दीया बांटण री होड़ मच्योड़ी। तिरंगा रा रंग में रंगयोड़ा दीयां री लेणां घरां माथै लागयोड़ी दिखी। अबकाळी चीनी लटूडय़ां री लडय़ां कम ही बिकी। लोगां में चीन अर चीनी सामान नीं खरीदण री होड़ मच्योड़ी रही। सैर सूं लेयर गांवां मांही माटी रा दीया री पूछ हुई।
अठे देस में दिवाळी री पूजा सिंज्या रा अर रात में सिंह लगन में करी। परिवार रा सें जणां पूजा करयां पछै। घर परिवार रा सगळा जणां ने निरोगा राखण अर खेत खलिहाण में खूब धन लिछमी बरसण री अरदास मां महा लिछमी सूं करी। देस रा गांवां में अबकाळी खरीफ री फसलां कठेई ठीक तो कठैर्ई पोची रही। सब आप-आप रा ही भाग रा जिमे। केई ठौड़ मूंग चौखा हुया। अर केई जणां रै तो फसलां बखतसर बरसात नीं हुवण सूं लातरगी। आप-आपरी किस्मत अर सांवरा री मरजी। किसान भाई गांवां में दिवाळी रै सागै ही सियाळु फसल री त्यारी में लागयौड़ा। 
देस री दिवाळी तो घणी अनूठी हुवै। परदेस में बस्योड़ा प्रवासी भाई भी दिवाळी रो घणो आणन्द लेवै। घर परिवार में सें जणां राजी खुसी अर सोरा। आपरै बठै टाबरां ने आसीस बंचावसी अर  बड़ा बुजरगां ने पगै लागणा मानज्यौ। भगवान री किरपा सूं अठे सगळा राजी खुसी हां। बूढ़ा बडेरा सब रामजी री किरपा सूं राजी खुसी सोरा अर आणंद सूं रह रहया। अठे टाबर टोळी सें जणां मजा में। आप सें जणां भी भगवान री दया सूं राजी खुसी हुवोला। जाण पिछाण रा सगळा जणां ने घणा मान सूं राम-राम जै श्रीकृष्णा बोलज्यो। कागद मिलतां ही सगळा समंचारां सागै जवाब दिरावज्यौ। 
 बाबूलाल टाक    राजस्थानी सौरम

No comments:

Post a comment