Saturday, 7 October 2017

परम्परा

काति सिनान नेम सूं काम करण रौ सन्देसो
सरद पुनयू री रात ने इमरत बरस्यो अर खीर रौ परसाद जिमयां पछे तड़के ही एकम स्यूं काति सिनान सरु हुय ग्यो। दादी नानी झांझरके ही तारां तारां सिनान कर मिन्दर जावन्ति अर पूजा करती। बडेरा रां री चलायोड़ी रीत में केई विज्ञान सम्मत बातां नूवां जमाना रा  टाबरां री समझ में कोनी आवे जका आधी रात तंहि सुता रहवे अर दिनुगे मोड़ा जागे। एक महीनो काति सिनान अर पांच दिन पंच तीरथयां रा सिनान करण री आदत बण जावे । सूरज उग्यां पेलां ही सिनान ध्यान कर त्यार हुय जावै अर दिन भर आपरा काम कर सके। टेमसर काम करण री आदत बण जावै तो साल भर इण रै अनुसार पालना कर सके।

1 comment:

  1. अे रीता तो गांवां में रिवी है । म्‍हारी गळी में नाईयां री अर बिरामणां री लुगायां तड्कै उठै न्‍हाय धोय'र मिंदर जुळस रै रूप में जावे अर इसा मीठा गीत गावै ज्‍यांनै सुण'र नीं जागण वाळो ई जाग ज्‍यावै । मींदर रै मांय आरती री बगत ओ लुगायां रो झूलरो इसो रंग बणावै देखणियो देखतो ई रह ज्‍यावै पण नूवी पीढ़ी इण मीठास सूं अळगी गूदडा़ं मांय पड़या जूण पूरी करै । म्‍हनै लागै अा परम्‍परा बोदल्‍या है बठा तक है आगे रामजी जाणै

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