Monday, 16 October 2017

राजिया रा सोरठा

काळी घणी करूप, कस्तूरी कांटा तुले।
सक्कर बड़ी सरूप, रोड़ा तुले राजिया।।

कवि राजिया आपरा सोरठा में कहवे'क आदमी री पूछ रंग रूप सूं नहीं उणा रा गुणा सूं हुयां करे।ज्यूँ काळी अर कुरूप कस्तूरी तो कांटा में तुले अर सक्कर बड़ी सरूप हुवे पण रोड़ा मतलब भाटा रा बाटा सूं तोली जावै। राजिया री बखत सक्कर सेर,आधा सेर अर पांच सेर र् भाटा सूं तोली जावन्ति।

1 comment:

  1. जग में नर हळवा जकै बोलै हळवा बोल
    आप तणै मुख आप री मूरख करदे मोल

    इस जगत में वे लोग जो घटिया किस्‍म के है वे घटिया ओछी बातें ही करते है ओर इस प्रकार वे अपने ही मुह से अपनी मूर्खता अपना ओछापन प्रकट कर देते है इसलिए कवि नें उपरोक्‍त दूहा कहा है सही है

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