Tuesday, 10 October 2017

केबत

पाणी पेलां पाळ बांध्योड़ी आडी आवै।
बडेरा इण केबत सूं सन्देस देवे क संकट आवण सूं पेलां ही उपाय कर लेवणो चाहिजै। पुराणी बखत में कहवन्ता हा क मेह आवण सूं पेलां ही खेत अर धोरा माथे पाळ बांध लेवणी चाहिजै जको घणो मेह बरस्यां सूं पाणी आयां खेत बहवण रौ अर खेत री उपजाऊ माटी रै खेत सूं बारे बहयर जावण रा खतरा सूं बंच जावै।

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