Thursday, 5 October 2017

उत्थलो राजस्थानी सूं हिंदी

लाखां,लोहां,चमड़ा, पैली किसा बखाण।
बहू, बछेरा, डीकरां, निमटीया परवाण।।
लाख,लोहा,चमड़ा, बहू, बछड़ा और पुत्र इनकी पहले से प्रशंसा की जाए ये कैसे निकलते हैं इसके बारे में पता तो बाद में ही लगता है कि वे कैसे रहे।

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