Tuesday, 12 September 2017

उत्थलो राजस्थानी सूं हिन्दी

संपत थोड़ी रिण घणो बैरी बाड़ै बास।
नदी किनारे रूखड़ो जद कद होय बिणास।।

व्यापार के लिए थोड़ी सम्पति और ऋण अधिक हो षत्रु के बाड़े के पास घर हो तथा नदी के किनारे पर पेड़ का कभी भी विनाष निष्चित होगा।

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