Friday, 15 September 2017

उत्थलो राजस्थानी सूं हिन्दी

अंवेरयां तो घर बधै,छापयां बधै बाड़।
सीधो बोल्यां हेत बधै, आडो बोल्यां  राड़।।
मितव्ययता से चलने पर घर में सम्पत्ति बढ़ती है,बाड़े या खेत की मेड़ को छापने से बाड़ बधती है, सीधा बोलने से प्रेम बढ़ता है जबकि टेढ़ा बोलने से दुश्मनी बढ़ती है

1 comment:

  1. बांट्या तो विद्या बढे, छाप्या बढे है बाड़
    मीठा बोल्या मन बढे, कड़वा बोल्या राड़
    मूल तो यह है बाकी राम जाणे
    फौजी

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