Monday, 18 September 2017

बडेरां री सीख

नींद न आवै तीन जण,कहजै सखी कियां।
प्रीत बिछोयां,बहुरिणां, का घणीज डिकरियां।।

दोहो अपणे आप में ही अरथ बताय देवै। कवि कहवै क तीन जणां ने नींद कोनी आयां करै,बेटयां घणी हुवै,जका रै माथै करजो घणो हुवै अर जका री प्रीत बिछड.गी हुवै।

2 comments:

  1. सही फरमायौ.....

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  2. 🌹रंग राजस्थानी....

    🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

    पांचा मीत, पचीसां ठाकर ,
    सोवां सग्गो सोई ।
    इतरा खातर मती बिगाङो,
    होणी हो सो होई ।। 【लोक साहित्य】

    पांच रुपयों के लिए मित्र , पच्चीस के लिए ठाकुर , सौ रुपयों के लिए समधी या रिश्तेदारों से नहीं बिगाङनी चाहिए ।

    सवाईसिंह महिया


    🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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