Saturday, 23 September 2017

उत्थलो राजस्थानी सूं हिन्दी

परभाते गेह डम्बरां, दोपारां तपंत।
रात्यूं तारा निरमळा, चेला करो गछन्त।।

प्रातः काल बादल छाए रहे दोपहर में गर्मी और रात को निर्मल तारे दिखाई दे तो गुरु अपने चेले से कहीं ओर दूसरे स्थान पर चलने के कहता है। कवि कहता है कि यह सारे संकेत आने वाले समय में काळ पड़ने के हैं।


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