Sunday, 24 September 2017

उत्थलो राजस्थानी सूं हिन्दी

आक न आलो काटिये,नीम न घालिए घाव।
रोहिड़े ने काटणिया, तेरो दरगाह होसी न्याव।।


पेड़ पौधों वनस्पति एवं पर्यावरण संरक्षण की सीख देने वाले लोक व्यवहार में प्रचलित इस दोहे में कवि कहता है कि आक को भी नहीं काटना चाहिए। नीम के पेड़ पर तो कुल्हाड़ी मारकर घाव भी नहीं करें काटना तो अधिक बड़ा अपराध है। रोहिड़ा के पेड़ को काटने वाले का न्याय तो भगवान करेंगे।

No comments:

Post a comment